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Best Idea Earn Money From Silk Farming | रेशम की खेती से हो रही लाखों में कमाई, जानिए पूरा प्रोसेस

Earn Money From Silk Farming | रेशम की खेती से हो रही लाखों में कमाई, जानिए पूरा प्रोसेस – आज की इस पोस्ट में आपको यही बताने की कोशिश की जायेगी की आखिर रेशम की खेती किस तरह से की जाती है और उसका क्या प्रोसेस होता है? किस तरह से Silk Farming करके लाखों रुपए कमा सकते हैं। अगर आप ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं और आपके पास काफी जमीन है तो आप रेशम की खेती करके साल के लाखों रुपए कमा सकते हैं। इसीलिए इस पोस्ट में Silk Farming के बारे में संपूर्ण जानकारी दी गई है, अंत तक जरूर पढ़ें।

आज के समय में महिलाओं से लेकर पुरुषों के बीच रेशम के कपड़े रेशम के कपड़ों के प्रति काफी इच्छा देखने को मिलती है, इसलिए वर्तमान में सिल्क के कपड़ों की इतनी डिमांड है कि इसके लिए अलग से Silk Farming की जाती है। जहां बड़े पैमाने पर रेशमी कीड़ों को पाला जाता है और फिर उनसे सिल्क प्राप्त किया जाता है। 

Earn Money From Silk Farming | रेशम की खेती से हो रही लाखों में कमाई –

आपको बता दें कि सिल्क का प्रचलन सबसे पहले चीन देश में शुरू हुआ था। उसके बाद धीरे-धीरे अन्य देश भी रेशम की खेती करने लग गए। भारत में भी कई राज्यों में किसानों के द्वारा रेशम की खेती की जा रही है और साल के लाखों रुपए कमा रहे हैं। 

रेशमकीट का जीवन चक्र –

रेशम की खेती की प्रोसेस को जानने से पहले एक बार यह जान ले कि रेशम कीट का जीवन चक्र कितना होता है? रेशम कीट के जीवन चक्र को समझने के बाद हमें Silk Farming को समझने में अधिक परेशानी नहीं होगी। सिल्कवर्म एक ऐसा कीड़ा है, जिससे रेशम प्राप्त किया जाता है। शहतूत रेशम कीट का जीवन चक्र 45 से 55 दिन में पूरा होता है। जिसमें अंडे, लारवा कोकून या प्यूपा और कीट के चरण होते हैं ।

अंडे की अवस्था 9 से 10 दिन तक चलती है, लारवा अवस्था 24 से 28 दिन और प्यूपा अवस्था 8 से 10 दिन जबकि कीट अवस्था 3 से 4 दिन की होती है। 

आपको बता दें कि मादा कीड़े अपने पूरे जीवन काल में 200 से 300 अंडे देती हैं। लगभग 10 दिन में प्रत्येक अंडे से लारवा बाहर निकलता है और 30 से 40 दिन बाद लारवा विकसित होकर बढ़ा हो जाता है। यह लारवा अपने मुंह से लार निकालता है, जिसमें तरल प्रोटीन मौजूद होता है। 

इस दौरान सिल्क के कीड़ों को भारी मात्रा में शहतूत के पत्ते दिए जाते हैं ताकि वह जल्दी-जल्दी विकसित हो सके और अधिक से अधिक मात्रा में को कोकून तैयार करें।  हवा लगने पर यह लारवा धीरे-धीरे सूखकर धागे का रूप ले लेता है और रेशम के कीड़े इस धागे को अपने चारों और लपेट लेते हैं। रेशम के कीड़ों के ऊपर लिपटे हुए यह धागे नुमा पदार्थ को ही कोकून कहते हैं, जो रेशम बनाने के काम आता है। 

कोकून के बाद यह पूरी तरह से एडल्ट मोर्थ बन जाते हैं लेकिन कोकून बनते ही इन्हें गर्म पानी में डाल दिया जाता है ताकि रेशम का धागा प्राप्त किया जा सके। इस तरह सिल्कवर्म का जीवन चक्र पूरा हो जाता है। 

कारखाने में रेशमकीट बनाने की प्रक्रिया –

सिल्कवर्म फार्मिंग (Silk Farming) के लिए एक साफ-सुथरे स्थान की आवश्यकता होती है। आपको बता दें कि सबसे पहले रेशम के कीड़ों के अंडे को सावधानीपूर्वक मशीन पर रखा जाता है और फिर मशीन की मदद से इन पर पौष्टिक भोजन डाला जाता है। इसके बाद हैचिंग का इंतजार किया जाता है। सभी अंडों को समान मात्रा में भोजन मिल सके इसके लिए एक सॉफ्ट ब्रश की मदद से न्यूट्रिशन फूड को फैलाया जाता है। 

आपको बता दें कि हैचिंग और मोल्डिंग के बाद रेशम कीट अधिक खाना शुरू कर देते हैं और तेजी से बढ़ते हैं। रेशम के कीड़ों को जगाने और उन्हें एक्टिव करने के लिए दिन में तीन बार भोजन कराया जाता है। इस कार्य एवं रेशम के कीड़ों की देखरेख करने के लिए फैक्ट्री में कई कर्मचारी नियुक्त किए जाते हैं। 

आगे की प्रोसेस के लिए सिल्कवर्म को मॉडल सिल्कवर्म रियरिंग रुम में शिफ्ट किया जाता है। जहां उपयुक्त तापमान में इन्हें रखा जाता है। अगला चरण रेशम कीट को फार्म में लाना होता है।  फार्म में लाने के लिए इसलिए इन्हें एक बड़े पेपर में फोल्ड करके क्रिटर्स में रखा जाता है। यहां से किसी वाहन की मदद से रेशम कीट को मुख्य कृषि स्थान में रखा जाता है।

मुख्य कृषि स्थान नायलॉन के साथ पंक्तिबद्ध होता है। इस एरिया में दोबारा से कुछ लोगों की मदद से रेशम कीट को फैलाया जाता है। फिर सभी को एक जाल की मदद से ढक दिया जाता है और इसी जगह रेशम कीट के पसंदीदा भोजन का भी इंतजाम किया जाता है।

आपको बता दें कि रेशम के कीड़ों को शहतूत के पत्ते बहुत ज्यादा पसंद होते हैं। इसलिए रेशम के कीड़ों के लिए अधिक मात्रा में शहतूत के पत्ते डाले जाते हैं। इस समय रेशम के कीड़े 6 घंटे के अंतर से दिन में 4 बार भोजन करते हैं।

रेशम कीट बड़े व्यस्क बनने से पहले अपनी स्किन छोड़ देते हैं। इस स्टेज में रेशम कीट बहुत खाते हैं, इसलिए बड़ी मात्रा में शहतूत की आवश्यकता होती है। इसके लिए फॉर्म में शहतूत की खेती की जाती है ताकि जरूरत के हिसाब से शहतूत के पत्ते प्राप्त किए जा सके। 

आपको जानकर हैरानी होगी कि 30,000 रेशम कीट के लिए 1500 किलो भोजन की आवश्यकता पड़ती है। 5 दिन की आयु में रेशम कीट अधिक रेशे वाली पूरी शाखाओं को खा जाते हैं। रेशम कीट दिन में 15 घंटे तक खाते हैं। लगभग 6 से 8 दिनों के बाद रेशम कीट के खाने की स्पीड थोड़ी कम हो जाती है। 

इसके बाद यह धीरे-धीरे खाते हैं। जब रेशम कीट शाखाओं से पत्तों को खा लेते हैं तो एक-दो व्यक्ति मिलकर शाखाओं पर से कीड़ों को हटा देते हैं। इसके बाद सभी व्यस्क रेशम कीट को जमा कर लिया जाता है।

इसके बाद शुरू होता है कोकून बनने का सफर –

लगभग 4 या 5 दिन गुजर जाने के बाद कोकून बनने का यह प्रोसेस शुरू होता है। जमीन पर अलग-अलग रेशम कीटो को रखकर उन्हें एक बार फिर से जाल के माध्यम से ढका जाता है ताकि कीड़े एक जगह ही मौजूद रहे हैं। 

उसके बाद व्यक्ति एक पेन के मदद से रेशम के कीड़ों को लकड़ी के बोर्ड में डालता है। इस बोर्ड में कई छोटे-छोटे खाने बने होते हैं। 30 से 32 सेल्सियस तापमान पर सिल्कवर्म को हैंग किया जाता है। इसका फायदा यह है कि इस तरह से सिल्कवर्म से रेशम अच्छी तरह से प्राप्त किया जा सकेगा।

इस दौरान रेशम कीट सिल्क बनाने का कार्य शुरू कर देता है। चार-पांच दिन के बाद कोकून को हार्वेस्ट किया जा सकता है। लकड़ी के सभी फ्रेमंस को निकालकर एक मशीन में डाला जाता है। जिसके जरिए उस में मौजूद कोकून एक-एक करके निकलते जाते हैं और फिर मैनूयल छटाई प्रक्रिया शुरू होती है। मैनुयल छटाई प्रक्रिया के दौरान इसमें से खराब गुणवत्ता कोकून को हटा दिया जाता हैं। 

कोकून छटाई में कई लोग मिलकर इस कार्य को पूरा करते हैं। अच्छी क्वालिटी के कोकून को अलग-अलग बोरी में बंद करके रेशम कारखाने में भेजा दिया जाता है। यहां सारे कोकून को मशीन में डाला जाता है और एक बार फिर से उनकी छटाई होती है। कोकून को सॉफ्ट करने और रेशम का धागा प्राप्त करने के लिए उन्हें गर्म पानी में भिगोया जाता है। 

कोकून से धागा प्राप्त होने पर उसे मशीन पर रोल करने का कार्य शुरू कर दिया जाता है। कताई शुरू करने के लिए मशीन में रेशम को सेट किया जाता है और जब यह कार्य पूरा हो जाता है तो धागे के सभी लक्ष्क्षों को एक-एक करके जमा कर लिया जाता है।‌ फिर जरूरत के हिसाब से कपड़ा फैक्ट्री या मार्केट में सप्लाई के लिए भेजा जाता है। 

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आपको बता दें कि Silk प्राप्त करने के लिए पूर्ण कीट के बाहर निकलने से पहले ही कोकून को खोलते पानी में डालकर सिल्कवर्म को अंदर ही मार देते हैं और धागे को अलग कर लेते हैं।‌ इस तरह रेशम कीट से रेशम बनता है और इसके बाद इन रेशम के धागों की मदद से कपड़ा आदि वस्तुओं का निर्माण होता है। 

रेशम की खेती कहाँ होती है –

दोस्तों, अगर आप चाहे तो रेशम के कीड़ों द्वारा रेशम का उत्पादन कर अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। Silk Farming करने के लिए जमीन की जरूरत पड़ती है क्योंकि यह कृषि आधारित उद्योग है। अगर आप चाहो तो आप भी Silk Farming करके अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। 

चीन के बाद अब भारत में बड़े पैमाने पर रेशम कीट पालन किया जाता है जिसे सेरीकल्चर कहते हैं। दक्षिण भारत में रेशम कीट पालन और इससे जुड़े उद्योग काफी लोकप्रिय है। खासतौर से जम्मू कश्मीर, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु के किसानों के लिए Silk Farming आमदनी का एक अच्छा जरिया है। इसके अलावा भारत के अन्य जैसे छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बड़े पैमाने पर Silk Farming किया जाता है। 

इस खेती की सबसे दिलचस्प बात यह है कि Silk Farming उद्योग को बहुत ही कम लागत में लगाया जा सकता है और आप यह कार्य कृषि कार्यों और अन्य घरेलू कार्यों के साथ-साथ बड़ी आसानी से कर सकते हैं। हालांकि रेशम की उत्पत्ति या शुरुआत चीन से मानी जाती है। मगर Silk Farming भारत में ही रचा बसा है। भारत के अलावा ब्राजील, रूस, फ्रांस, जापान और इटली जैसे देशों में भारी मात्रा Silk Farming की जाती है।

वर्तमान में रेशम की बढ़ती मांग को देखते हुए व्यवसायिक रूप से उनकी पांच प्रकार की किस्में है। रेशम कीट के विभिन्न प्रजातियों से प्राप्त होती है जो निम्न प्रकार है – जैसे शहतूत रेशम, गैर शहतूत रेशम, ओकतसर रेशम, मूंगा रेशम, कोसा रेशम और एरी या अरंडी रेशम। 

रेशमकीट पालन के लिए आवश्यक वस्तुएं –

अगर आप भी रेशम कीट पालन करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कुछ चीजों की आवश्यकता पड़ेगी जैसे – कीट पालन स्टैंड, बूम लगा हुआ पैराफिन कागज, ब्राजील का स्पेयर, फार्म पैड, पत्ते रखने के लिए टोकरी, नायलॉन की जाली और बांस के नाइट्रिक या माउंटेन। 

रेशम उत्पादन व्यवसाय में निवेश –

Silk Farming व्यवसाय मुख्य रूप से जमीन के ऊपर निर्भर होता है यानी आप इस व्यवसाय के लिए कितनी जमीन इस्तेमाल करना चाहते हैं? अगर आप यह व्यवसाय बड़े स्तर पर करना चाहते हैं तो आपको अधिक निवेश करने की आवश्यकता होगी और अगर आप इस व्यवसाय को छोटे स्तर पर शुरू करना चाहते हैं तो कम निवेश की जरूरत पड़ेगी।

Silk Farming करने के लिए अगर आपके पास अपनी जमीन है तो आप कम पैसे में ही सिल्क बिजनेस शुरू कर सकते हैं। इस व्यवसाय को छोटे स्तर पर शुरू करने के लिए कम से कम 2 लाख रुपए निवेश करने की आवश्यकता होगी।  इसके अलावा बड़े स्तर पर करने के लिए आपको कम से कम 10 से 12 लाख  रुपए निवेश करने होंगे। 

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि भारत में रेशम कीट को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उत्प्रेरित विकास योजना की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से सिल्क व्यवसाय के लिए ऋण 50 फीसदी सब्सिडी के साथ दिया जा रहा है।

रेशम कीट पालन में सबसे महत्वपूर्ण कारक –

रेशम कीट पालन में से दूध सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है क्योंकि इसके बिना आप रेशम कीट पालन नहीं कर सकते हैं। आपने ऊपर भी पढ़ा होगा कि रेशम कीट का सबसे पसंदीदा भोजन शहतूत की पत्तियां होता है। 

इस व्यवसाय के लिए आपको शहतूत के पेड़ को आपको बार-बार लगाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इस पौधे को एक बार लगाने पर यह अगले 15 वर्षों तक शहतूत की पत्तियां उपलब्ध कराता है। इस व्यवसाय के लिए शहतूत के पौधों का वृक्षारोपण करते समय टेक्निकल पैरामीटर्स को ध्यान में रखना चाहिए। 

आपको बता दें कि कोकून उत्पादन करने में लगभग आपकी 50% राशि शहतूत की पत्तियों के उत्पादन में खर्च करनी पड़ती हैं। आज के समय में भारत में लगभग 60 लाख से ज्यादा किसान और महिलाएं सिल्कवर्म फार्मिंग के जरिए अपनी आजीविका कमा रहे हैं।

निष्कर्ष –

रेशम कीट पालन करना इसलिए भी आसान है क्योंकि इनसे कम समय और कम मेहनत में अच्छे खासे रुपए कमा सकते हैं। रेशमकीट का जीवन चक्र कितना होता हैं और कारखाने में रेशमकीट बनाने की प्रक्रिया क्या होती हैं आदि सवालों के बारें में विस्तार से बताया हैं। दोस्तों अगर आप भी Silk Farming करके साल के लाखों रुपए कमा सकते हैं तो यह आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। 

अब आप बताइए कि आपको Silk Farming के बारें में ऊपर दी गई जानकारी कैसी लगी है। अगर आपको इस जानकारी से कुछ नया सीखने को मिला है तो कमेंट करके जरूर बताएं। हमारे द्वारा लिखी गई इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ साझा करना बिल्कुल भी नहीं भूले।

Prakash Bansrota

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